पृथ्वी के बारे में कुछ रोचक जानकारी

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दोस्तों आज हम हम्मरी पृथ्वी के बारे में बात करने वाले है इसमें हम पृथ्वी और उससे जुड़े सभी विषयों पर चर्चा करेगे और जानेगे की पृथ्वी  क्या है और  इस पर ही क्यों जीवन सम्भव है ?


     सूर्य
मौर्य साम्राज्य अति महत्वपूर्ण प्रश्न

तो जानते है पृथ्वी के बारे में की आखिर पृथ्वी क्या है 

दोस्तों प्रथ्वी एक गृह है जो सूर्य के चारो और चक्कर लगाती है और इसी गृह पर हम रहते है   तथा उसके साथ-साथ अपनी धुरी पर भी घुमती है और पृथ्वी की इस गति को घूर्णन गति कहते है पृथ्वी अपने अक्ष पर एक पूरा चक्कर घुमने में 24 घंटे का समय लेती है  और पृथ्वी की इसी गति के कारन पृथ्वी पर दिन व् रात होने की घटना होती है पृथ्वी की घूर्णन गति के कारण पृथ्वी का जो हिस्सा सूर्य के सामने होता है उस हिस्से में दिन होता है और जो हिस्सा सूर्य के विपरीत होता है उस हिस्से में रात होती है  पृथ्वी अपने अक्ष पर सीधी ना होकर  थोड़ी सी झुकी हुई है 

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पृथ्वी की उत्पत्ति

दोस्तों अगर हम इसकी उत्पति की बात करे तो इसका उत्पन्न होंना सूर्य से मन जाता है कहा जाता है की पृथ्वी सूर्य का ही एक टुकड़ा है जिसने सूर्य से टूटने के बाद ठंडा होने पर पृथ्वी का रूप लिया है यह चट्टनो से बनी  थी और इसमें और इसमें रेडियोधर्मी पदार्थ पाए जाते थे जैसे युरेनियम, पोटेशियम  यह पदार्थ विस्फोटक प्रवर्ती के होते है और गैब इनमे विस्फोट हुआ  तो असीम ऊष्मा निकली ऊष्मा की मात्रा अधिक होने के कारण इस सूर्य टुकड़े का तापमान बहुत अधिक बढ़ गया जिससे यह द्रवित हो गया पर जैसे-जैसे यह ठंडा होने लगा तो इसके गुरुत्वाकर्षण बल के कारण फिर से संकुचन होने लगा पिघला हुआ लोहा घनत्व और भारी होने के कारण केंद्र में इक्कट्ठा हो गया और इसी से  पृथ्वी के केन्द्रीय भाग क्रोड़ (core) का निर्माण हुआ और कम भर वाले कण core सतह के उपर जमा होने लगे जो मध्यम भार के थे जिससे पृथ्वी के एक और भाग प्रवार का निर्माण हुआ और सबसे हल्के तत्व उपर के सतह पर जमा हो गए जिससे भू-पर्पटी का निर्माण हुआ  और पृथ्वी के चट्टानों में उपस्तिथ  जल वाष्प और गैस के अणुओ के मुक्त होने से जल वाष्प से समुद्र और गैस के अणुओ से वायुमंडल का निर्माण हुआ इस तरह हमारी पृथ्वी का विरमान माना जाता है इस तरह पृथ्वी के उत्पत्ति में 80करोड़ से अधिक वर्ष लग गए 

पृथ्वी के प्रमुख भाग

भू-पर्पटी (crust)

 यह पृथ्वी का सबसे उपरी भाग है और  इसी भाग पर हम रहते है अन्तरिक्ष से देखने पर हमें पृथ्वी का यही भाग दिखाई देता है यह हलकी चट्टानों से बना है और यह चट्टानें सिलिका से बनी हुई है या हम कह सकते है की इन में अधिक मात्रा में सिलिका पायी जाती है यह एक परत के सामान होती है  है जो पृथ्वी के केंद्र और उसक्वे मध्यम भाग को ढके रहती है इस पार्ट की मोटाई सभी जगह एक समान नही होती है यह विभिन्न-विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग होती है जैसे की पहाड़ी स्थानों पर  इसकी मोटाई अधिक होती है और मैदानी भाग में मध्यम आकार की और समुद्री भाग में कम होती है पथ्वी के इसी  भाग पर  मनुष्य की मुलभुत आवश्यकता पानी और मिटटी  पायी जाती है भू-पर्पटी का लगभग 3/4 भाग समुद्र से घिरा है 

प्रवार 

यह भाग पृथ्वी की उपरी  सतह भू- पर्पटी के नीचे होता है  इसके अंदर मध्यम घनत्व वाले पदार्थ पाए जाते है इसका घनत्व भू- पर्पटी से अधिक और क्रोड़ से कम होता है  यह भाग भू- पर्पटी से 2900 किलोमीटर की  गहराई  तक पाया  जाता है और इस भाग को हम अन्तरिक्ष से नही देख सकते है  इसका दाब अधिक होता है और हम जैसे जैसे गहराई में जाते जाते है इसके दाब का मान बढता जाता है प्रवार में मुख्य रूप से सिलिका ,लोहा , मैगनीशियम धातु  पायी जाती है प्रवार पृथ्वी के केंद्र  क्रोड़ को ढका रखता है जिससे इसका  तापमान भी उच्च होता है 

क्रोड़ (core)

इसे पृथ्वी का केंद्र माना जाता है  पृथ्वी के इस भाग का ताप ,दाब ,और घनत्व तीनो भागो में सबसे अधिक होता है इस भाग में ठोस लोहा पाया जाता है  और इसका चुम्बकीय प्रभाव अधिक  होता है और इस भाग में गुरुत्वाकर्षण बल अधिक होता है  अगर हम इसके व्यास की बात करे तो इसका व्यास 6800 किलोमीटर है