मौर्य वंश चन्द्रगुप्त मौर्य

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दोस्तों आज हम बात करने वाले है मौर्य वंश के बारे में मौर्य वंश में हम आज विशेष तौर पर चन्द्रगुप्त मौर्य के  बारे  में चर्चा करेगे और मौर्य वंश में  आने  वाले   और शासको के बारे में हमने और आर्टिकल बनाये है 


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नंदवंश के अंतिम शासक को चन्द्रगुप्त मौर्य ने परास्त करके नन्द वंश पर एक नए वंश मौर्यवंश की स्थापना की जस्टिन के अनुसार चन्द्रगुप्त मौर्य को सिंड्रोकोटटस के नाम से भी जानते है  चंन्द्रगुप्त मोर्य को सभी शिक्षाए चाणक्य ने दी थी चाणक्य को कोटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है  यह चन्द्रगुप्तमौर्य का प्रधानमंत्री था मौर्य वंश की स्थापना करने और घनानंद को हराने में इसने चन्द्रगुप्त मौर्य की मदद की थी  चन्द्रगुप्त ने मगध का राज्य 322ई.पू. में अपने हाथ में लिया  यह जैन धर्म का अनुयायी था जैन धर्म की शिक्षा भद्रबाहु से ली थी 

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305 ई.पू. में यूनानी शासक सेल्युकसनिकेटर ने भारत पर आक्रमण कर दिया और चन्द्रगुप्त मौर्य और सेल्युकसनिकेटर  के बीच भयंकर युद्ध हुआ जिसमे चंद्रगुप्त मौर्य की विजय हुई लेकिन बाद में दोनों के  बीच संधि हो गयी और सेल्युकसनिकेटर ने अपनी पुत्री कार्नेलिया का विवाह चन्द्रगुप्त मौर्य से कर दिया और कंधार ,हिरात , बलूचिस्तान ,काबुल चन्द्रगुप्त को दे दिया सेल्युकसनिकेटर का राजदूत मेगस्थनीज था और यह इसी  के शासन में भारत आया था इसी के द्वारा इंडिका नामक पुस्तक की रचना की गयी थी 

महत्वपूर्ण तथ्य 

  • चाणक्य ने संस्कृत भाषा में राजनीती और प्रशासन से सम्बंधित पुस्तक अर्थशास्त्र की रचना की थी 
  • चन्द्रगुप्त मौर्य भारत का पहला चक्रवंती सम्राट कहा जाता है 
  • चन्द्रगुप्त मौर्य ने जीवन के अंतिम दिन श्रावणबेल्गया में बिताए और चंद्रगिरी की पहाडियों मापना शारीर त्याग दिया 
  • इसका उत्तराधिकारी बिन्दुसार बना 

 

दोस्तों आशा करते है मौर्य वंश के  बारे यह आर्टिकल आपको पसंद आएगा और भारतीय इतिहास से जुडी और जानकारी के लिए हमारे ब्लॉग पर विजित करते रहिए

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