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सूर्य

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दोस्तों आज हम बात करने वाले है  सूर्य के बारे है यह क्या है इसके कितने भाग है और किस भाग में किस प्रकार की क्रियाए होती है ?


सिन्धु सभ्यता अति महत्वपूर्ण प्रश्न
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mangal गृह

सूर्य के बारे में

 सूर्य एक तारा है  जो पृथ्वी के सबसे निकट है यह  सौर प्रणाली का  मुख्य होता है  और यह हमारी मंदाकनी आकाशगंगा के चारो और परिक्रमा लगा रहा है  पृथ्वी   के  पास होने के कारण हमें अन्य तारो से बड़ा दिखाई देता है और हमें  अन्य तारो से अधिक चमकदार दिखाई देता है सभी गृह सूर्य के चारो ओर चक्कर लगाते है  हम सूर्य के आकार की बात करे तो यह हमारी पृथ्वी से 100 गुना अधिक बड़ा है   इसका व्यास  लगभग 13 लाख 90 हजार किलोमीटर है  और हम  इसके द्रव्यमान की  तुलना पृथ्वी से  करे तो यह 10 लाख गुना अधिक है और प्रथ्वी का घनत्व सूर्य के घनत्व का 1/4 है   और र्सूय से प्र्थ्वी की दूरी लगभग डेढ़ करोड़ किलोमीटर है  के अंदर मुख्य रूप से हैड्रोजन तथा हीलियम  गैस पायी जाती है सूर्य में हैड्रोजन गैस 71 % और हीलियम गैस 26 .5 % और 2.2% अन्य तत्व जैसे की युरेनियम और लिथियम पाए जाते है  गैसों  से बने होने के कारण सूर्य  ठोस पिण्ड नही है  सूर्य  का परिक्रमण काल 25 करोड़ वर्ष है  वैज्ञानिको के अनुसार सूर्य अभी 5 अरब वर्ष और जीवित रहेगा !

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सूर्य  में उर्जा कैसे बनती है

सूर्य में उर्जा बनने का स्त्रोत नाभिकीय संलयन  क्रिया  है इसके अंतर्गत सूर्य के अंदर उपस्तिथ हैड्रोजन गैस हीलियम गैस में बदलती रहती है और असीम  मात्रा में  ऊर्जा निकलती है

सूर्य के भाग

सूर्य तीन भागो में बंटा है  नाभिक , प्रकाश मंडल और वर्णमंडल

नाभिक – सूर्य के केन्द्रीय भाग को नाभिक कहते है और इस भाग को कोर भी कहा जाता है इसका तापमान बहुत  अधिक होता है लगभग दो करोड़ केल्विन  और नाभिक का दाब भी अति उच्च होता है और अधिक ताप और दाब पर जब नाभिकीय संलयन  क्रिया  होती है तो बहुत अधिक ऊर्जा निकलती है 

 

प्रकाश मंडल – यह नाभिक के ऊपर का भाग होता है  जो 800 से 1600 किलोमीटर की परत होती है सूर्य के नाभिक के ऊपर होने के कारण इसका तापमान अधिक होता है जो लगभग  6००० K है  इसे सूर्य की तपोज्ज्वल परत भी कहते है 

 

 

वर्णमंडल –  प्रकाश मंडल के ऊपर गर्म गैसों की परत पायी जाती है जिसे वर्ण मंडल कहते है  और इसे कोरोना परत भी कहते है  गैसों से बना होने के कारण इस भाग का घनत्व सबसे कम होता है  इस परत से बहुत ही कम प्रकाश उत्सर्जित होता है प्रकाश मंडल के प्रकाश के कारण यह परत अद्रश्य रहती है लेकिन जब सूर्य ग्रहण  आता है  तो प्रकाश मंडल निकलने वाला प्रकाश चन्द्रमा से रुक जाता है  और यह परत दिखाई देने लगती है  

यह भी जाने

  • सूर्य  हमारी मंदाकनी दुग्ध्मेखला  से 30000 किलोमीटर दूर एक कोने में स्तिथ है
  • सूर्य का एक परिभ्रमण काल एक ब्रह्म्मांड वर्ष कहते है 
  • सूर्य के सबसे पास गृह बुध है 
  • सूर्य अन्य तारो की तुलना में पृथ्वी के सबसे अधिक पास है 
  • सूर्य में हैड्रोजन हीलियम गैस पायी जाती है 
  • सूर्य के केंद्र को नाभिक कहते है 
  • सूर्य के नाभिक के ऊपर का भाग प्रकाश मंडल कहलाता है 
  • प्रकाश मंण्डल के ऊपर गैसों से बनी हुई परत  वर्ण मंडल या कोरोना परत कहलाती है 
  • सूर्य से प्रकाश को प्रथ्वी तक पहुचने में 8 मिनिट16सेकेण्ड लगते है 
  • प्रकाश मंडल का तापमान 6000 k है 
  • सूर्य के द्दिप्तिमान सतह प्रकाश मंडल कहलाती है 

क्या होगा जब सूर्य में उपस्तिथ सारी हाइड्रोजन गैस हीलियम में बदल जाएगी 

दोस्तों सूर्य के अंदर हाइड्रोजन गैस होती है और नाभिकीय संलयन क्रिया के द्वारा हाइड्रोजन गैस हीलियम में बदल जाती है  यह क्रिया निरंतर चलती रहती है पर जब सूर्य में उपस्तिथ सारी हाइड्रोजन गैस  हीलियम में बदल जाएगी तो सूर्य  में नाभिकीय संलयन क्रिया समाप्त हो जाएगी और सूर्य से निकलने वाला प्रकाश धीरे-धीरे कम होने लगेगा और एक एसी बनेगी की सूर्य से प्रकाश निकलना बंद हो जाएगा  तब सूर्य की बाहरी सतह फूलकर लाल  हो जाएगी  और सूर्य लाल दानव तारा कहलाने लगेगा 

जब मृत्यु वाले तारे का द्रव्यमान चंद्रशेखर सीमा ( 1.4 MS) से अधिक हो जाता है  तो  सुपर नोवा विस्फोट होकर black hole में बदल जाता  है  black hole को ही कृष्ण विवर कहते है